Author(s)

Pratibha Tiwari

  • Manuscript ID: 140814
  • Volume: 2
  • Issue: 6
  • Pages: 3448–3451

Subject Area: Arts and Humanities

Abstract

समाज में परिव्याप्त स्त्रियों के दुःख-दर्द के साथ ही साथ उनके सशक्त व्यक्तित्व को व्यापक रूप से मानवीय धरातल पर अभिव्यक्ति देने वाली ज्ञानपीठ पुरस्कृत लेखिका कृष्णा सोबती का साहित्य प्रतिरोध, 'आत्म सम्मान और स्वाधिकार के चेतना का साहित्य है। वैसे तो लेखिका स्वयं को लेखिका मानती ही नहीं। वे कहती हैं "जब मैं लिखती हूँ तो याद नहीं रखती कि मैं महिला हूँ या पुरुष। लेखक प्रथमतः लेखक होता है स्त्री या पुरुष नहीं।"(समकालीन साहित्य समाचार पत्रिका-अंक जून 1995, पृष्ठ संख्या 35)

Keywords